जमशेदपुर में गैस संकट के बीच कालाबाजारी, 2200 का इंडक्शन 4000 में बेचा जा रहा।

by PragyaPragya
Jamshedpur Black Marketing : गैस संकट के बीच जमशेदपुर में कालाबाजारी, 2200 का इंडक्शन वसूल रहे 4000

जमशेदपुर : जमशेदपुर में रसोई गैस की कमी अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच गैस की आपूर्ति में बाधा आने की संभावना को देखते हुए लोग तेजी से **इंडक्शन चूल्हे** खरीदने लगे हैं। अचानक बढ़ती मांग के कारण बाजार में इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। कई दुकानों पर कुछ ही घंटों में कीमतों में सैकड़ों रुपये का इजाफा देखा गया है।

स्थानीय निवासी राहुल ने शनिवार की रात गोलमुरी से 1800 वाट का इंडक्शन चूल्हा 2200 रुपये में खरीदा। अगले दिन जब वह बाजार पहुंचे, वही चूल्हा 4000 रुपये में बिक रहा था। इस तरह, सिर्फ एक दिन में कीमत में लगभग साढ़े तीन सौ रुपये की वृद्धि हो गई। कई ग्राहक यह बताने लगे हैं कि बढ़ती मांग के साथ दुकानदार मनमाने दाम वसूलने लगे हैं। हालांकि कंपनियों ने आधिकारिक दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन खुदरा दुकानदार ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।

रसोई गैस की कालाबाजारी से हो रहा नुकसान

इस बीच, शहर में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी हो रही है। जमशेदपुर में रसोई गैस की कमी ने आम लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। एक ओर लोग घर में चूल्हा जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी करने वाले इस संकट का लाभ उठाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। शहर में 953 रुपये का घरेलू गैस सिलेंडर 2800 से 3000 रुपये तक बेचा जा रहा है। प्रशासन की अनदेखी के कारण डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित हो गई है।

छोटे गैस सिलेंडर की कीमत ₹1200 तक

कालाबाजारी का असर यहां तक पहुंच गया है कि 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर 1200 रुपये तक और 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 4200 से 4500 रुपये में बिक रहा है। कई डिलीवरी मैन और डिस्ट्रीब्यूटर केवल परिचितों को गैस उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि आम उपभोक्ताओं को “स्टॉक खत्म” बताकर लौटा दिया जाता है। पर्दे के पीछे मुंहमांगी कीमतों पर सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है।

प्रशासन की चुप्पी

जिला प्रशासन इस कालाबाजारी पर मौन रह रहा है। रसोई गैस सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में, कालाबाजारी करने वालों ने अपने तरीके बदल लिए हैं। गैस की डिलीवरी अब सीधे घरों पर नहीं, बल्कि सुनसान स्थलों पर की जा रही है। सबूतों से बचने के लिए डिलीवरी मैन केवल नकद भुगतान लेते हैं।

प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं। शहर में बढ़ती अफरातफरी के बीच प्रशासनिक स्तर पर केवल बैठकों का सिलसिला जारी है। कोल्हान आयुक्त की तरफ से बयान तो आए हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई का सुनिश्चित अभाव दिखाई दे रहा है। जिला आपूर्ति विभाग ने गैस एजेंसियों से बैठक की, लेकिन कालाबाजारी को रोकने के लिए न तो विशेष टीम गठित की गई और न ही कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उपभोक्ताओं के लिए कोई आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर नहीं है।

गैस संकट का असर खान-पान के कारोबार पर भी दिखने लगा है। साकची, बिष्टुपुर, गोलमुरी और बाराद्वारी जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में कई फूड आउटलेट्स बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। महंगे दामों पर गैस की व्यवस्था करने वाले दुकानदारों ने खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में 10 से 20 रुपये का इजाफा कर दिया है।

कुल मिलाकर, जमशेदपुर में गैस संकट ने लोगों के बीच उहापोह की स्थिति पैदा कर दी है। आम आदमी परेशान हैं और प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी प्रकार की ठोस सहायता का संकेत नहीं है।

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