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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
जमशेदपुर में एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल उठे 🏥
जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) अस्पताल में एक मरीज के गायब होने के मामले ने सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर प्रश्नों के घेरे में ला दिया है। बागबेड़ा के निवासी अरुण प्रमाणिक के रहस्यमय तरीके से लापता होने और बाद में साकची के पुराने कोर्ट परिसर में मिलने की घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर खासा ध्यान आकर्षित किया है। सामाजिक कार्यकर्ता विमल बैठा ने इस संदर्भ में अस्पताल में ‘ड्रेस कोड’ लागू करने की मांग की है।
घटना की पृष्ठभूमि: 🔍
महेश प्रमाणिक के अनुसार, उनका भाई अरुण 8 मार्च को खाना पकाते समय जल गया था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। 9 मार्च की रात लगभग 11 से 12 बजे के बीच अरुण अचानक अपने वार्ड से लापता हो गया। उसके परिजनों ने अस्पताल में हर जगह उसे खोजा, लेकिन कहीं उसका कोई सुराग नहीं मिला। थक-हार कर, परिजनों ने एमजीएम थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
घायल हालत में मिला मरीज 🚑
काफी खोजबीन के बाद अरुण प्रमाणिक को साकची स्थित पुराने कोर्ट परिसर में पाया गया। उसके परिजनों ने चिंता जताई है कि यदि किसी मरीज की मानसिक स्थिति ठीक न हो और वह अस्पताल से बाहर निकल जाए, तो उसके साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती है।
सुरक्षा की कमी पर उठे सवाल ❗
इस मामले के संदर्भ में, विमल बैठा के नेतृत्व में अरुण के परिजनों ने अस्पताल के उप-अधीक्षक को एक आवेदन सौंपा है। विमल बैठा ने कहा कि सरकार ने अस्पताल के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, लेकिन मरीजों की पहचान के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि भर्ती होने पर प्रत्येक मरीज को अस्पताल की ड्रेस दी जानी चाहिए, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके।
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
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