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नई दिल्ली: गोल्ड कोस्ट में आयोजित महिला एशियन कप के उद्घाटन मैच में ईरान और साउथ कोरिया की टीमों के बीच मुकाबला हुआ। इस मैच में ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने बिना कुछ कहे एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। मैच शुरू होने से पहले जब राष्ट्रगान बजा, तब ईरानी महिला टीम और उनके कोच ने चुप्पी साधे रखी। वे राष्ट्रगान गाने के बजाय सीधे खड़े रहे और इस दौरान उनका मौन एक विवादास्पद गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।
स्टेडियम में गूंजा ईरान का राष्ट्रगान
मैच से पहले दोनों टीमें इस अवसर पर पारंपरिक कतार में खड़ी थीं। जैसे ही ईरान का राष्ट्रगान स्टेडियम में गूंजा, खिलाड़ियों के होंठ चुप रहे। किसी ने भी गान के बोल नहीं गाए। यह दृश्य भले ही कुछ क्षणों तक ही रहा, लेकिन इसके नतीजे गहरे रहे। दर्शकों ने इसे ईरानी टीम द्वारा एक मजबूत संदेश के रूप में देखा। यह घटना उस समय हुई जब ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल हमलों में मौत की खबरें आईं।
साउथ कोरिया ने जीता मैच
इस मुकाबले में साउथ कोरिया ने शुरुआत से ही अपनी मजबूती दर्शाई। साउथ कोरिया ने ईरान के खिलाफ एकतरफा 3-0 से जीत दर्ज की। हालांकि, परिणाम ईरान के लिए निराशाजनक रहा, लेकिन कोच ने खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि साउथ कोरिया एशिया की शक्तिशाली टीमों में से एक है और मुकाबला कठिन होना तय था। कोच ने कहा कि कुछ व्यक्तिगत गलतियों ने टीम को नुकसान पहुंचाया।
खेल पत्रकार ट्रेसी होम्स का दावा
अनुभवी खेल पत्रकार ट्रेसी होम्स ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि गोल्ड कोस्ट में ईरानी महिला फुटबॉल टीम की किसी भी सदस्य ने राष्ट्रगान नहीं गाया। उनके अनुसार, टीम को ईरान से रवाना होने से पहले राष्ट्रपति प्रशासन के निर्देश प्राप्त हुए थे कि वे राष्ट्रगान का सम्मान करें। इसके बावजूद, टीम के मौन प्रदर्शन ने स्पष्ट किया कि वे अपने देश में चल रही घटनाओं से गहरे प्रभावित हैं।
चर्चा में ईरानी समर्थकों का समूह
मैच के दौरान स्टेडियम में ईरानी समर्थकों का एक समूह भी ध्यान का केंद्र बना रहा। इन समर्थकों ने इस्लामिक क्रांति से पहले के राष्ट्रीय ध्वज को लहराया। इस झंडे पर सुनहरे रंग का शेर और सूरज था, जो ईरान की पुरानी पहचान को दर्शाता है। स्टैंड में मौजूद दर्शक इस झंडे के साथ विशेष रूप से देखे गए।
फुटबॉल कमेंटेटर का फीडबैक
ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल कमेंटेटर लूसी जेलिक ने इस दृश्य पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खिलाड़ियों के इस रुख में अलग आत्मविश्वास का अनुभव हुआ। उनके अनुसार, यह नजारा पिछले वर्ष के एशियन कप क्वालिफिकेशन मुकाबलों से काफी भिन्न था, जब टीम ने मौजूदा ईरानी झंडे को सलामी दी थी। इस बार स्थिति बदल चुकी थी।
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