500 साल पुरानी परंपरा के तहत फगुआ काटा, होलिका जलाई गई » दृष्टि नाउ

by PragyaPragya
20260302 080232

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

राँची में परंपरागत होलिका दहन का आयोजन 🎉

रविवार रात झारखंड की राजधानी राँची के ऐतिहासिक चुटिया नगरी में होलिका दहन का परंपरागत कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह स्थल, जो नागवंशी राजाओं की प्राचीन राजधानी रहा है, आज भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के लिए लोकप्रिय है। यह आयोजन झारखंड में होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यहाँ सबसे पहले होलिका जलाने की परंपरा है।

फगुआ काटने की रस्म का अनुष्ठान 🌿

रात लगभग 10:30 बजे, शुभ मुहूर्त पर ग्राम पाहन ने स्नान कर नए वस्त्र धारण किए। वे जल लेकर डोल जतरा मैदान पहुंचे, जहां उन्होंने एक ही वार में अरंडी की डाल काटकर फगुआ काटने की रस्म निभाई। यह अनुष्ठान नागवंशी काल से चली आ रही एक विशेष परंपरा है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है।

श्रीराम मंदिर में पूजा-अर्चना 🙏

इसके बाद, राधाबल्लभ मंदिर के महंत ने विधिवत पूजा-अर्चना की। होलिका प्रज्वलित की गई और आरती की गई। दहन के पूर्व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। सैकड़ों भक्त इस पावन अवसर का हिस्सा बने और होलिका की परिक्रमा की।

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व 📜

चुटिया में 1685 ईस्वी में स्थापित श्रीराम मंदिर धार्मिकता का केंद्र है। यहां का होलिका दहन समारोह लगभग 500 वर्ष पुराना है, जो नागवंशी राजाओं के समय से जुड़ा हुआ है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इतिहास, संस्कृति, और आस्था का एक जीवंत प्रतीक भी है। फगडोल जतरा मैदान में यह आयोजन फगडोल जतरा समिति द्वारा आयोजित किया जाता है।

इस अनोखी परंपरा के माध्यम से चुटिया राँची के साथ-साथ पूरे झारखंड में होली की शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। होली के रंगों से पहले यहाँ की अग्नि बुराई को जलाकर नई शुरुआत का संदेश देती है।

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

Your Opinion on this News...

You may also like

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More