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दुमका में चुनावी माहौल गरमाया, धांधली के आरोप उठे
दुमका: नगर परिषद चुनाव प्रचार खत्म होते ही दुमका में चुनावी धांधली के आरोपों ने माहौल में उथल-पुथल मचा दी है। गाँधी नगर मोहल्ले में रात के समय कथित तौर पर पैसे देने को लेकर दो समूहों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अभिषेक चौरसिया अपने समर्थकों के साथ मोहल्ले में आए और मतदाताओं को पैसे देकर प्रभावित करने का प्रयास किया। जब इसका विरोध हुआ, तो कहासुनी बढ़ी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दो स्थानीय निवासियों को हिरासत में लिया।
स्थानीय निवासियों का आरोप
रांची में नगर निकाय चुनाव की ड्यूटी पर तैनात एक कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसका शव मोरहाबादी डिस्पैच सेंटर में खड़ी गाड़ी के अंदर मिला। इस घटना के बाद, पुलिस कार्रवाई से नाराज़ स्थानीय लोग थाने में जाकर आरोपियों को छोड़ने की मांग करने लगे, जिसके कारण पुलिस ने भीड़ को वहाँ से हटाया। मोहल्ले के निवासियों का मानना है कि प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शुभम कुमार नामक एक स्थानीय निवासी ने बताया कि प्रत्याशी ने जातीय भेदभाव का इस्तेमाल करते हुए अपशब्द कहे और धमकी दी।
भाजपा की प्रतिक्रिया
धनबाद के बारनी घाट में हो रहे अवैध कोयला खनन को लेकर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में झामुमो के अघोषित प्रत्याशी द्वारा धनबल से चुनाव प्रभावित करने का आरोप भाजपा के जिलाध्यक्ष रुपेश मंडल ने लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो भाजपा धरना देने पर मजबूर होगी। वहीं, अभिषेक चौरसिया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अजय झा उर्फ मिक्की के समर्थक ही पैसे बांटने आए थे, जिन्हें पुलिस के हवाले किया गया। उन्होंने प्रशासन से 23 फरवरी को होने वाले निकाय चुनाव को निष्पक्ष कराने की मांग की।
सवालों के घेरे में प्रशासन
इस मामले पर अजय झा उर्फ मिक्की ने भी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जांच से सच्चाई उजागर होगी। उन्होंने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की उचित मांग की और कहा कि जरूरत पड़ी, तो चुनाव आयोग में भी शिकायत करेंगे। मौके पर मौजूद एसडीपीओ विजय कुमार महतो ने इस मामले की जानकारी मांगे जाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब यह देखना है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगा और क्या दुमका निकाय चुनाव शांति और पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सकेगा।
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