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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
हिमंत सरकार ने राजस्व संग्रह को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब यदि किसी को सरकार को एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा करनी है, तो उसे केवल NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के माध्यम से ही ऐसा करना होगा। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में सभी उच्च अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
NEFT और RTGS के कार्यप्रणाली 🔄
इन दोनों तरीकों को स्पष्ट रूप से समझें। NEFT में पैसे का ट्रांसफर बैच सिस्टम के माध्यम से होता है, जो समय के अंतराल पर छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करता है। दूसरी ओर, RTGS में पैसे का ट्रांसफर तुरंत हो जाता है; जैसे ही व्यक्ति राशि भेजता है, वह तुरंत अंतर्गत खाते में पहुंच जाती है। दोनों प्रणाली रिजर्व बैंक द्वारा संचालित होती हैं और बड़े लेनदेन के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं।
सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम क्यों? 🤔
वित्त मंत्रालय के अनुसार, RBI के ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से जब राशि NEFT या RTGS से आती है, तो वह सीधे सरकारी खाते में रीयल टाइम में दर्ज हो जाती है। अतीत में बड़ी रकम के ट्रांसफर में देरी होती थी, जिससे प्रक्रियाएं लंबी खींचती थीं। अब विशेष रूप से, पैसे तुरंत सरकारी खाते में दिखेंगे, जिससे फंड की उपलब्धता स्पष्ट हो जाएगी।
समाज व विभागों पर प्रभाव 💼
यह नया नियम विशेष रूप से उन लेनदेन पर लागू होगा, जहां एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि सरकार को जमा करनी है। अब इस तरह की बड़े ट्रांजैक्शन के लिए चेक या अन्य पारंपरिक विधियों के बजाय सीधे NEFT या RTGS का उपयोग होगा। इससे भुगतान प्रक्रिया के विश्राम, ट्रैकिंग की सटीकता और पारदर्शिता में वृद्धि होगी।
सरकार को क्या लाभ होगा? 💰
इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राजस्व सीधे सरकार के खाते में पहुंच जाएगा। इससे कैश फ्लो में सुधार होगा और योजनाओं के लिए आवश्यक फंड की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित होगी। सरकार को विश्वास है कि इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और वित्तीय प्रबंधन में मजबूती आएगी।
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