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दिल्ली एआई समिट में रोबोटिक डॉग ‘Orion’ का विवाद
दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान गलगोटियाज यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक डॉग ‘Orion’ का प्रदर्शन किया। यूनिवर्सिटी ने इसे अपने इनहाउस इनोवेशन के तौर पर पेश किया, लेकिन विशेषज्ञों ने जल्दी ही पहचान लिया कि यह दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का **Unitree Go2** मॉडल है। इस विवाद के चलते यूनीवर्सिटी को एआई समिट से बाहर निकलने के लिए कहा गया है।
भारत में कीमत और उपलब्धता
Unitree Go2 की भारतीय बाजार में कीमत लगभग ₹2-3 लाख है। ये विभिन्न वेरिएंट्स में उपलब्ध है, जैसे Air, Pro और EDU, जिन्हें Robu.in, Etherbit.in, Xboom.in, FlySpark.in, Everse.in और Dronevex.in जैसे वितरणकर्ताओं के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
- Go2 Air: लगभग ₹1.45 लाख
- Go2 Pro: ₹2.32-2.55 लाख
शिपिंग चार्ज स्थान और मॉडल के आधार पर $399 से $1000 तक हो सकता है।
विशेषताएँ और स्पेसिफिकेशन्स
Unitree Go2 के एडवांस्ड फीचर्स इसे खास बनाते हैं:
- बॉडी: एल्यूमिनियम अलॉय और इंजीनियरिंग प्लास्टिक से निर्मित
- वजन: लगभग 16 किलो
- स्पीड: 3.7 m/s (करीब 13 km/h)
- बैटरी: 8000 mAh, 1-2 घंटे का रनटाइम
- सेंसिंग टेक्नोलॉजी: 3DLiDAR और 720p कैमरा
- कनेक्टिविटी: Wi-Fi 6 और ब्लूटूथ सपोर्ट
- एक्टिविटीज: चलना, कूदना, स्ट्रेच करना, डांस करना, सीढ़ियाँ चढ़ना
रोबोट डॉग की खासियतें
Unitree Go2 एक AI-पावर्ड स्मार्ट डॉग है, जो रियल-टाइम मैपिंग और ऑटोमैटिक ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस में सक्षम है। यह इंडोर और आउटडोर दोनों में संतुलित और स्मूद मूवमेंट करता है।
- Go2 Air: एंट्री-लेवल और किफायती मॉडल
- Go2 Pro: एडवांस्ड यूजर्स के लिए ज्यादा स्थिरता और नियंत्रण
- Go2-W (2025): व्हील्ड-लेग वेरिएंट, CES में लॉन्च होने वाला है
विवाद की रूट्स
यूनिवर्सिटी ने इसे अपनी नवीनता बताते हुए खराब तरीके से प्रक्षिप्त किया, जबकि यह पहले ही 2023 में पेश किया गया कमर्शियल प्रोडक्ट है। इस से यूनिवर्सिटी को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है, और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में उनके स्टॉल को हटाने की आवश्यकता पड़ी।
गलगोटियाज यूनिवर्सिटी का बयान
आलोचनाओं के तेज़ होते ही गलगोटियाज यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस रोबोटिक डॉग के निर्माताओं में से नहीं हैं। विश्वविद्यालय ने इसे छात्रों के लिए एक सीखने का उपकरण बताया है और इसे “चलती-फिरती क्लासरूम” कहा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि नवाचारों की कोई सीमाएँ नहीं होतीं, और इस विरोध को “नकारात्मक प्रचार” करार दिया।
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