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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, संजीव कुमार ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों और वन प्रमंडल पदाधिकारियों को संकेत दिए हैं कि वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वनों की सुरक्षा अब सबसे प्रमुख प्राथमिकता है।
फरवरी से मानसून तक अग्नि का खतरा बढ़ता है 🌧️
संजय कुमार ने जानकारी दी कि आमतौर पर वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं फरवरी से लेकर मानसून तक देखी जाती हैं। इस अवधि में, भारत सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग और स्थानीय समुदायों का सक्रिय होना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनता का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जिला और रेंज स्तर पर कंट्रोल रूम का गठन 🏢
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सभी जिलों को एक जिला एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, हर जिला और रेंज स्तर पर 24 घंटे क्रियाशील कंट्रोल रूम स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने एक टोल फ्री नंबर जारी करने की योजना भी साझा की है, जिससे ग्रामीण, मुखिया, वनवासी और छात्र आपात स्थितियों में तुरंत संपर्क कर सकें।
तकनीक और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग आवश्यक 📡
संजय कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तकनीक का भरपूर उपयोग करें। ड्रोन, सैटेलाइट अलार्म सिस्टम और अन्य उपकरणों की मदद से जंगल की निगरानी की जाए। इसके साथ ही, जल भंडारण, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन से लगातार संपर्क स्थापित करना आवश्यक है। सूचना की जल्दी प्राप्ति आग को नियंत्रित करने में मदद करेगी।
लोक जागरूकता बढ़ाना जरूरी 📢
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सुझाव दिया कि जनता को आग से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है। जंगल में सिगरेट या बीड़ी जलाना या आग लगाना हानिकारक हैं। इसके लिए नुक्कड़ नाटक और अन्य स्थानीय माध्यमों से लोगों को शिक्षित किया जाना चाहिए।
सफाई और अलर्ट रहना आवश्यक 🚀
सभी वन प्रमंडल पदाधिकारियों को सूखी पत्तियों की नियमित सफाई करने, वन आग रेखा पर कार्य करने और अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में वन संरक्षक प्रशासन के श्री पी आर नायडू, वन संरक्षक वी एस दुबे और राज्य के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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