एक फंक्शन में जज के तौर पर बाकायदा सम्मानित भी हुआ.
एक शख्स ने पुलिस स्टेशन में फोन किया. उसने बताया कि वो जज है और उसे एक कार्यक्रम में जाने के लिए पुलिस सुरक्षा चाहिए. पुलिस ने उसे गाड़ी और एक गार्ड मुहैया करा दिया. इस सिक्योरिटी के साथ उसने कई फंक्शन में हिस्सा भी लिया. यहां तक कि एक कार्यक्रम में जज के तौर पर बाकायदा उसे सम्मानित भी किया गया. इतना सब होने के बाद पता चला कि पुलिस के साथ घूम रहा वो शख्स जज है ही नहीं.
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मामला महाराष्ट्र (Maharashtra) के लातूर का है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसने खुद को फैमिली कोर्ट का जज बताया था. स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर संजीवन मिर्कले ने बताया कि 28 जून को शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में एक आदमी ने फोन किया था. उसने खुद को जज बताया और एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पुलिस से गाड़ी मांगी थी.
रिपोर्ट के मुताबिक इंस्पेक्टर संजीवन मिर्कले ने बताया,
उस व्यक्ति को पुलिस की एक गाड़ी और गार्ड दिया गया था. उस दिन वो अहमदपुर के शिवनखेड में अलग-अलग कई कार्यक्रमों में गया. एक कार्यक्रम में बतौर जज उसे सम्मानित भी किया गया.
वहीं जब कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, तब पुलिस को कुछ गड़बड़ लगी. पुलिस ने जांच की और पता चला कि वो शख्स लोगों के साथ-साथ पुलिस को भी धोखा दे रहा था. फर्जी जज बनकर घूम रहा था.
संजीवन मिर्कले ने बताया कि आरोपी का नाम मीर अली यूसुफ अली सैयद है. उम्र 32 साल है. वह इंडियन नगर का रहने वाला है. उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. मीर अली यूसुफ के खिलाफ धोखाधड़ी और दूसरे अपराधों के तहत केस दर्ज किया गया है. कोर्ट ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है.
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