भारत से हार पर मोहसिन नकवी को जिम्मेदार ठहराया: मोहम्मद यूसुफ ने उठाए सवाल

by TejaswitaTejaswita Mani
'पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास का सबसे घटिया दौर...', भारत से रिकॉर्ड हार के लिए पूर्व पाक दिग्गज ने मोहसिन नकवी के सिर फोड़ा ठीकरा | T20 World Cup 2026 Mohammad Yousuf raised questions after the defeat against India PCB Mohsin Naqvi

नई दिल्ली: टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज के मैच चल रहे हैं। 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले में भारत की टीम ने पाकिस्तान को 61 रन से शिकस्त दी, जिसके बाद पाकिस्तानी क्रिकेट में हलचल मच गई है।

अब पाकिस्तान के लिए सुपर 8 में पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है, और नामीबिया के खिलाफ अगला मैच उनके लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति में है। इसी बीच, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद यूसुफ ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है।

अंक तालिका में गिरावट

भारत से मिली हार का असर पाकिस्तान की नेट रन रेट पर भी पड़ा है। अब टीम अंक तालिका में पीछे हो गई है और नामीबिया के खिलाफ होने वाला अगला मुकाबला निर्णायक बन गया है। क्रिकेट प्रशंसकों में निराशा का माहौल है, जहाँ कई पूर्व खिलाड़ी टीम की रणनीति और चयन पर प्रश्न उठा रहे हैं। कोलंबो में हारी हुई यह स्थिति केवल एक मैच की हार नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियों को भी उजागर करती है।

मोहम्मद यूसुफ की नाराजगी

पूर्व महान क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान क्रिकेट से राजनीतिक दबाव और निजी स्वार्थ हटाए नहीं जाएंगे, तब तक टीम अपनी पुरानी पहचान वापस नहीं पा सकेगी। यूसुफ ने यह भी कहा कि यह हमारे क्रिकेट के इतिहास का सबसे भयानक दौर है, और इसके लिए उनका दिल दुखता है। उन्होंने नाकाबिल लोगों को टीम और प्रबंधन से हटाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मोहसिन नकवी के विवादास्पद निर्णय

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के निर्णय पहले भी कई विवादों में रहे हैं। एशिया कप 2025 ट्रॉफी संबंधी विवाद और भारत के खिलाफ संभावित बहिष्कार ने खेल और राजनीति के रिश्ते को और जटिल बना दिया है। आलोचकों का मानना है कि इन निर्णयों ने टीम की तैयारी को प्रभावित किया। टी20 विश्व कप से पहले पाकिस्तान को एक बहिष्कार का ऐलान करना पड़ा था, लेकिन आईसीसी के दबाव के चलते उन्हें अपना निर्णय बदलना पड़ा। इस असमंजस ने टीम का ध्यान भटका दिया, जिससे उनकी स्थिति और भी कमजोर हुई।

आगे की राह की कठिनाई

अब पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को मजबूत करना है। नामीबिया के खिलाफ जीत ही केवल उनकी उम्मीदों को बनाए रख सकती है। हालांकि, असली सुधार मैदान से अधिक प्रशासनिक ढांचे में बदलाव से ही होगा। यदि यह हालात नहीं बदलते हैं, तो संकट और गहरा हो सकता है।

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