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दिल्ली में आदिवासी संगठनों का धरना-प्रदर्शन
रांची: सरना धर्म कोड की मांग को लेकर 17-18 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आदिवासी संगठन अपने अधिकारों के लिए धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस आंदोलन में झारखंड के आदिवासी समुदाय के लोग भी शामिल होंगे। इस विषय को ध्यान में रखते हुए स्पेशल ब्रांच ने रांची, रामगढ़, जामताड़ा, पलामू और पूर्वी सिंहभूम के डीसी और एसएसपी-एसपी को सतर्क किया है। उन्हें हिदायत दी गई है कि ट्रेन से दिल्ली जाने के दौरान कानून-व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
आदिवासी समाज का आयोजन
स्पेशल ब्रांच ने जानकारी दी है कि 7 फरवरी को रांची के पिस्का मोड़ पर राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा सभा की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने की। इस अवसर पर यह बताया गया कि सरना धर्म कोड के समर्थन में धार्मिक क्रांति का आह्वान किया गया है।
दिल्ली जाने वाले लोगों की संख्या
रांची से केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप और टीएसी सदस्य नारायण उरांव के नेतृत्व में लगभग 1000 लोग रांची और हटिया स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। ये सभी लोग दिल्ली में अंबेडकर भवन में ठहरेंगे।
इसके अलावा, रामगढ़ से लखींद्र मुंडा, दिनेश मुंडा और सुनील मुंडा के नेतृत्व में करीब 200 लोग बरकाकाना और रांची रेलवे स्टेशन से ट्रेन द्वारा नई दिल्ली पहुंचेंगे। ये लोग धरना स्थल पर टेंट लगाकर रहेंगे।
जामताड़ा जिले से मांझी परगना बाईसी के जिला प्रभारी जगदीश मुर्मू के नेतृत्व में भी आदिवासी समुदाय के लोग दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं।
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