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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
हाथियों के आतंक पर काबू पाने के लिए झारखंड का नया मास्टर प्लान
रांची | 14 फरवरी 2025: झारखंड में हाथियों के हमलों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में राज्य के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘एलिफेंट कॉरिडोर मास्टर प्लान’ को मंजूरी दी गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और पारंपरिक उपायों का समावेश किया गया है।
10 साल का दृष्टिकोण: 31 मार्च तक बनेगा रोडमैप
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल तात्कालिक राहत पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए एक 10-Year Vision Document तैयार किया जा रहा है, जो 31 मार्च 2026 तक अंतिम रूप ग्रहण करेगा। इस दस्तावेज़ में हाथियों के प्राकृतिक आवास में सुधार और वनों के पुनरुद्धार के लिए 30 मुख्य मुद्दे शामिल हैं।
AI और थर्मल कैमरों से हाथियों की निगरानी 🔍
इस मास्टर प्लान का मुख्य आकर्षण उन्नत तकनीक का प्रयोग है:
- डिजिटल मैपिंग: राज्य में सभी पुराने और नए हाथी कॉरिडोर की सटीक मैपिंग की जाएगी।
- AI तकनीक: हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और थर्मल इमेजिंग कैमरों का उपयोग किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को समय पर सूचना मिल सके।
- सुरक्षित मार्ग: रेलवे ट्रैक और सड़कों के नीचे अंडरपास बनाए जाएंगे, और सड़कों के किनारे लोहे की ऊंची दीवारों (फेंसिंग) का निर्माण किया जाएगा।
रेस्क्यू हेतु 6 ‘कुमकी’ हाथियों की सहायता 🐘
सरकार अब 6 प्रशिक्षित ‘कुमकी’ हाथियों को बुला रही है, जो जंगली हाथियों को बस्तियों से सुरक्षित वापस जंगल में लाने में मदद करेंगे। इसके अलावा, रांची के निकट 5-10 हेक्टेयर में एक आधुनिक एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
मुआवजा प्रक्रिया में परिवर्तन: 12 दिनों में भुगतान 📜
पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि हाथी के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को 12 दिनों के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान प्रदान किया जाए। इसके अतिरिक्त, फसल और मकान के नुकसान के लिए भी मुआवजा नियमों को आसान बनाया गया है।
ग्रामीणों को दी जाएगी ‘सुरक्षा किट’ और प्रशिक्षण 🎓
प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से:
- सुरक्षा किट: ग्रामीणों को सौर-सायरन, टॉर्च, डीजल और मशाल जैसी सामग्री प्रदान की जाएगी।
- प्रशिक्षण: ग्रामीणों को ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ के साथ मिलकर काम करने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “हमारा लक्ष्य इंसान और हाथी दोनों की जान बचाना है। यह मास्टर प्लान झारखंड के वनों और वन्यजीव प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।”
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