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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड में जीता गया महत्वपूर्ण कानूनी मुकदमा, जिसमें प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन PLFI के खिलाफ कठोर सजा सुनाई गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने छह आरोपियों को आतंकवाद, अवैध हथियार रखने और रंगदारी वसूली के मामलों में 10 साल की कठोर कारावास की सजाएं सुनाई हैं।
सजा का आधार
रांची स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट ने यह सजा भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सुनाई। पिछले सप्ताह सभी आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
सजा पाने वाले आरोपी
इनमें प्रमुख आरोपी हैं गुलाब कुमार यादव, रवि यादव, राकेश कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, संतोष यादव और सुरेश यादव। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि ये सभी PLFI के सक्रिय सदस्य थे और संगठन की अवैध गतिविधियों में संलग्न थे।
मामले का विवरण
यह मामला दिसंबर 2018 का है, जब झारखंड पुलिस ने लातेहार जिले के बालूमाथ क्षेत्र में छापेमारी की थी। जानकारी मिली थी कि वहाँ PLFI के हथियारबंद सदस्य सभा कर रहे हैं। छापेमारी में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से विदेशी राइफलें, गोलियां, सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए। बाद में दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
एनआईए की जांच की प्रक्रिया
जून 2019 में एनआईए ने इस केस की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। फरवरी 2020 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत सबूत पेश किए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आरोपी संगठित रूप से आतंक फैलाने, अवैध हथियार इकट्ठा करने और रंगदारी वसूली में शामिल थे।
आरोपियों की भूमिकाएं
जांच में पता चला कि संतोष यादव लातेहार और चतरा जिलों में PLFI का उप-जोनल कमांडर था, जबकि सुरेश यादव भूमिगत कार्यकर्ता के रूप में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति में सहायता करता था।
आतंकवाद पर प्रहार
एनआईए ने इस निर्णय को PLFI की आतंकवाद और रंगदारी गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ा झटका बताया है। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि वह देश में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।
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