मुंबई: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में ‘रामायण’ जैसे प्रतिष्ठित धारावाहिकों के निर्माता-निर्देशक पद्मश्री रामानंद सागर के परिवार पर दुख का एक नया साया छा गया है। उनके बड़े बेटे आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का 13 फरवरी 2026 को मुंबई में निधन हो गया है। परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद समाचार की पुष्टि की है।
रामानंद सागर के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
आनंद सागर का अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस हिंदू श्मशान घाट में किया गया। वे सागर आर्ट्स प्रोडक्शन हाउस के एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं, जिसकी नींव उनके पिता रामानंद सागर द्वारा रखी गई थी। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘रामायण’ ने देश के हर घर में अपनी छाप छोड़ी थी और आज भी इसे याद किया जाता है।
आनंद ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया और कई धार्मिक एवं पौराणिक धारावाहिकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उत्पादन, रचनात्मक देखरेख और प्रबंधन में सक्रिय थे। उनके योगदान में 2008 में ‘रामायण’ का रीमेक प्रमुख है, जिसे उन्होंने निर्देशित और प्रोड्यूस किया। उनके द्वारा निर्मित ‘अलिफ लैला’, ‘विक्रम और बेताल’, ‘श्री कृष्ण’, ‘जय गंगा मैया’ और ‘आंखें’ जैसे शो भी दर्शकों में प्रिय रहे हैं। इन कामों ने नई पीढ़ी को महाकाव्यों और कथा-साहित्य से जोड़े रखा।
टीवी इंडस्ट्री, फिल्म जगत और फैंस में दौड़ी शोक की लहर
आनंद सागर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी परिवार और काम को नहीं छोड़ा। जैसे ही निधन की खबर फैली, टीवी इंडस्ट्री, फिल्म जगत और फैंस के बीच शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का ज्वार उमड़ पड़ा है। कई लोगों ने इंस्टाग्राम और एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘रामानंद सागर की विरासत को संवारने वाले आनंद जी का जाना अत्यंत दुखद है। उनकी आत्मा को शांति मिले।’ परिवार के सदस्यों ने पोस्ट में कहा, ‘हमारे प्रिय पिता आनंद रामानंद सागर चोपड़ा हमारे बीच नहीं रहे। हम सभी की प्रार्थनाओं के लिए आभारी हैं।
रामानंद सागर परिवार टेलीविजन इतिहास का एक प्रतिष्ठित नाम रहा है। आनंद सागर ने इसे नया आकार दिया और भक्ति-आधारित कंटेंट को जीवंत रखा। उनका जाना एक युग के अंत जैसा प्रतीत होता है, लेकिन उनके द्वारा दी गई कहानियां हमेशा जीवित रहेंगी। पूरे मनोरंजन जगत में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है।
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