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विनोद मेहरा: बॉलीवुड के चॉकलेटी बॉय की दुखभरी कहानी
बॉलीवुड में कई सितारे अपने नाम और काम के बल पर लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिनकी निजी जिंदगी में खुशियों की कमी रही। ऐसे ही एक अभिनेता थे **विनोद मेहरा**, जिनकी ज़िंदगी की कहानी सुखद नहीं रही। चार शादियों के बावजूद, वे हमेशा अकेलेपन से जूझते रहे और 45 की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए।
पर्सनल लाइफ की मुश्किलें
विनोद मेहरा का निधन एक गंभीर सदमा था। उन्होंने अपनी प्रेग्नेंट पत्नी किरण मेहरा और एक साल की बेटी को अकेला छोड़ दिया। जब उनका निधन हुआ, उस समय किरण अपने दूसरे बच्चे की उम्मीद कर रही थीं। विनोद का आकस्मिक निधन उनके परिवार पर भारी पड़ गया।
शानदार करियर की शुरुआत
**विनोद मेहरा** का जन्म 13 फरवरी 1945 को अमृतसर में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1958 की फिल्म **’रागिनी’** से की, लेकिन बतौर मुख्य अभिनेता के रूप में 1971 की **’एक थी रीता’** से पहचान मिली। उनके करियर की सबसे बड़ी सफलता 1972 में आई फिल्म **’अनुराग’** से मिली। इसके बाद, उन्होंने **’अनुरोध’**, **’अमर प्रेम’**, और **’नागिन’** सहित लगभग 100 फिल्मों में काम किया।
शादी और व्यक्तिगत संघर्ष
विनोद मेहरा की पहली शादी उनकी मां की इच्छा पर हुई थी। इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री **बिंदिया गोस्वामी** से शादी की, लेकिन यह रिश्ता भी चार साल से ज्यादा नहीं टिक पाया। इसके बाद उन्होंने किरण मेहरा से तीसरी शादी की। उनके संबंधों में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर किरण के पिता की नाराजगी।
अंतिम दिन और विरासत
विनोद मेहरा ने कुल चार शादियां कीं, लेकिन उनकी चौथी शादी को कभी भी वैधता नहीं मिली। उनका व्यक्तिगत जीवन हमेशा साधारण नहीं रहा। उनके बच्चों, **सोनिया** और **रोहन** ने भी बॉलीवुड में कदम रखा है, लेकिन वो अपनी father’s सफलता को दोहराने में असफल रहे हैं।
विनोद मेहरा की कहानी ये बताती है कि भले ही एक व्यक्ति कितनी ही सफलता और प्रसिद्धि प्राप्त कर ले, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में सुख का अनुभव हमेशा नहीं होता।
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