यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ पर विवाद, धार्मिकता और अश्लीलता पर उठे प्रश्न

by PragyaPragya
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फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर विवादों में घिरा

नई दिल्ली। यश की बहुचर्चित फिल्म ‘टॉक्सिक’ ने अपने टीजर रिलीज के बाद से ही विवादों को जन्म दे दिया है। इस टीजर में दिखाए गए सेक्स सीन पर महिला आयोग की आपत्ति के बाद अब राष्ट्रीय क्रिश्चियन फेडरेशन (NCF) ने भी अपनी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि टीजर में कब्रिस्तान के बाहर सेक्स सीन को दिखाने के बाद कब्रिस्तान के अंदर गोलीबारी का दृश्य पेश किया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। खासकर ‘आर्कएंजल माइकल’ की मूर्ति का गलत चित्रण समस्याग्रस्त बताया गया है। NCF ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से इस टीजर को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की है।

महिला आयोग की कड़ी आपत्ति

महिला आयोग ने भी टीजर में दिखाए गए सेक्स सीन को खराब बताकर इसे अश्लील करार दिया है। कई लोगों ने इसे ‘अनावश्यक’ माना और ऐसे सीन को सीमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विवाद के चलते इस सीन में नजर आई एक्ट्रेस बीट्रिज टौफेनबाक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को भी डिलीट कर दिया। आयोग का मानना है कि ऐसी सामग्री से महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया जाता है।

निर्देशक का समर्थन

इस बीच, फिल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप ने फिल्म का समर्थन करते हुए विरोधियों को ‘पाखंडी’ कहा। उन्होंने टिप्पणी की है कि समाज पुरुषों की कामुकता को स्वीकार कर जाता है, लेकिन जब एक महिला अपनी कामुकता प्रस्तुत करती है, तो विवाद उत्पन्न हो जाता है। यह दोहरे मानदंडों को दर्शाता है और कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है।

फिल्म की विशेषताएं

फिल्म ‘टॉक्सिक’ का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस फिल्म में यश के अलावा नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय जैसे चर्चित सितारे होंगे। फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और इसकी टक्कर रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ से होगी, जिससे इसमें कड़ी प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है।

सामाजिक और कानूनी चुनौतियाँ

फिल्म के मेकर्स KVN Productions वर्तमान में कानूनी एवं सामाजिक विरोध का सामना कर रहे हैं। इस विवाद ने दिखा दिया है कि पैन इंडिया फिल्मों में टीजर या ट्रेलर के कंटेंट के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है। यह मामला दर्शकों की प्रतिक्रियाओं और सांस्कृतिक संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को भी उजागर करता है।

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