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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
उधवा क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक जुड़ाव का अहम खुलासा
साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड के दियारा क्षेत्र में रहने वाले लगभग 2.5 लाख निवासियों की सामाजिक तथा आर्थिक वास्तविकता पश्चिम बंगाल से गहराई से जुड़ी हुई है, लेकिन वे बंगाल के मतदाता नहीं हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी पश्चिम बंगाल की राज्य मंत्री और मोथाबाड़ी विधायक सबीना यास्मीन ने हाल ही में साझा की।
स्थानीय बैठक में उठाए मुद्दे
दक्षिण पलाशगाछी बाजार परिसर में आयोजित एक बैठक के दौरान, सबीना यास्मीन ने बताया, “उधवा दियारा के लोग सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पूरी तरह बंगाल पर निर्भर हैं। उनकी जीवनशैली, व्यवसाय, और रिश्ते बंगाल की भूमि से जुड़े हुए हैं, फिर भी वे वहां के मतदाता नहीं हैं।”
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र की अधिकांश भूमि पश्चिम बंगाल के कालियाचक ब्लॉक-2 में दर्ज है, और अभी भी रजिस्ट्री बंगाल में ही हो रही है। हालांकि, झारखंड सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण इन भूमि पर है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड सरकार केवल अस्थायी सुविधाएं प्रदान कर रही है, जबकि स्थायी अधिकार और विकास की आवश्यकता है।
भूमि अधिकार के लिए कानूनी प्रयास
सबीना यास्मीन ने वादा किया कि “हम प्रभावित लोगों को बंगाल सरकार की सभी सुविधाएं दिलाने का प्रयास करेंगे। भूमि अधिकार के लिए हम कानूनी लड़ाई लड़ेगे, ताकि दियारा क्षेत्र के निवासियों को उनका उचित हक मिल सके।”
यह बयान उधवा दियारा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और भूमि अधिकार के मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में लाया है। स्थानीय लोग गंगा के कटाव और सीमा विवाद से गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जहां एक तरफ बंगाल की जमीन दर्ज है और दूसरी ओर झारखंड का प्रशासनिक नियंत्रण है।
इस प्रकार, यह मुद्दा न केवल सामाजिक न्याय की मांग करता है, बल्कि इन निवासियों के दीर्घकालिक विकास के लिए भी अहम है।
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