किसानों के 2 रुपये से बनी मंथन ने रचा ऐतिहासिक व राष्ट्रीय अवॉर्ड जीते

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फिल्म ‘मंथन’: एक ऐतिहासिक कृति

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में कई महत्वपूर्ण फिल्में बनी हैं, परंतु कुछ ऐसी हैं जो अपने निर्माण की प्रक्रिया और कहानी की वजह से विशेष महत्व रखती हैं। एक ऐसी ही फिल्म है ‘मंथन’, जो 1976 में रिलीज हुई। यह केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि यह किसानों की आवाज, उनके संघर्ष और आत्मसम्मान का प्रतीक थी, जिसे किसानों ने खुद अपने पैसे से बनाया था।

दिग्दर्शक और कलाकार

फिल्म का निर्देशन renowned filmmaker श्याम बेनेगल ने किया था, और इसकी कहानी उन्होंने मशहूर लेखक विजय तेंदुलकर के सहयोग से लिखी थी। फिल्म में स्मिता पाटिल ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि गिरीश कर्नाड ने डॉक्टर राव के रूप में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया। नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा और अमरीश पुरी जैसे वरिष्ठ कलाकारों ने भी अपनी बेहतरीन अदाकारी से फिल्म को खास बनाया।

कहानी का संकेंद्रण

‘मंथन’ की कहानी गुजरात के किसानों और उनके दूध के व्यापार के इर्द-गिर्द घूमती है। यह फिल्म गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन से प्रेरित थी, जिसने बाद में अमूल जैसे सफल सहकारी मॉडल की नींव रखी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे डेयरी वाले किसानों का शोषण करते हैं और उन्हें उनके दूध की उचित कीमत नहीं मिलती। जाति प्रथा और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे भी फिल्म में गहराई से उजागर किए गए हैं।

फाइनेंसिंग मॉडल की अनोखापन

इस फिल्म की एक विशेषता इसका फाइनेंसिंग मॉडल है। ‘मंथन’ को निर्मित करने के लिए किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्टूडियो का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि लगभग 5 लाख किसानों ने दो-दो रुपये का चंदा देकर फिल्म का निर्माण कराया। इसलिए इसे भारत की पहली क्राउड फंडेड फिल्म कहा जाता है। फिल्म के शुरुआत में स्क्रीन पर यह लिखा जाता है कि यह फिल्म गुजरात के 5 लाख किसानों द्वारा प्रस्तुत की गई है, जो इसे और भी खास बनाता है।

स्मिता पाटिल का किरदार

फिल्म में स्मिता पाटिल ने बिंदु नाम की एक गरीब लेकिन आत्मनिर्भर महिला का किरदार निभाया, जो दूध बेचकर अपने बच्चों की परवरिश करती है। उनका यह किरदार कमजोर नहीं, बल्कि संघर्षशील और सशक्त महिला की पहचान बन गया। स्मिता पाटिल की अदाकारी को उस समय अत्यधिक सराहा गया और आज भी इसे उनकी बेहतरीन प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

पुरस्कार और सम्मान

‘मंथन’ को न केवल दर्शकों से अपार प्रेम मिला, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त हुई। श्याम बेनेगल को इस फिल्म के लिए बेस्ट फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि विजय तेंदुलकर ने बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। फिल्म के गाने के लिए प्रीति सागर को भी फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कान फिल्म फेस्टिवल में पुनः प्रकाश

48 साल बाद, मई 2024 में ‘मंथन’ को कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे फिर से सराहना मिली। आज भी यह फिल्म अपनी सामाजिक चेतना, सशक्त कहानी और अनोखे निर्माण के कारण उतनी ही प्रासंगिक और चर्चित है, जितनी कि इसके रिलीज के समय थी।

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