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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंदन में एक महत्वपूर्ण राउंड टेबल संवाद आयोजित किया गया। इस बैठक में झारखंड के सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के साथ-साथ यूके के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और कौशल विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल ने की। इस संवाद का प्रमुख उद्देश्य था, झारखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें वैश्विक अवसरों से जोड़ना।
सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यह संवाद झारखंड की अबुआ सरकार की योजना को मजबूती प्रदान कर रहा है, जिसमें शिक्षा, कौशल और स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
झारखंड में यूके की विश्वविद्यालयों का निमंत्रण 📚
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में, अबुआ सरकार युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड को एक भौगोलिक इकाई के अलावा वैश्विक शिक्षा और नवाचार का संभावित केंद्र साबित करने का प्रयास किया। उन्होंने यूके के विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को झारखंड में अपने शाखाएँ खोलने के लिए आमंत्रित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की गतिविधियाँ मुख्यतः पश्चिमी भारत, दिल्ली एनसीआर, और दक्षिण भारत में केंद्रित हैं, जबकि पूर्वी और मध्य भारत अभी भी इससे अछूते हैं। ऐसे में, यह आवश्यक है कि इन विश्वविद्यालयों अपनी उपस्थिति पूर्वी भारत में, विशेषकर झारखंड में, दर्ज कराएं।
उच्च शिक्षा में तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान 🔍
प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के तीन प्रमुख स्तंभों की चर्चा की: राज्य संकाय विकास अकादमी की स्थापना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अनिवार्य आठ सप्ताह की इंटर्नशिप, और राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क। इस दौरान यह भी बताया गया कि झारखंड ने उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता के मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है, जहाँ यूके जाने वाली छात्राओं की संख्या अधिक है।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार 💡
बैठक में, अप्रेंटिसशिप, शिफ्ट-आधारित शिक्षा, उद्योग, संबद्ध डिग्री कार्यक्रमों और आईटीआई पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण पर भी चर्चा की गई। केयर इकोनॉमी, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी, हरित कौशल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और खनन से संबंधित अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी गई। यूके के भागीदारों ने झारखंड के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए ट्रांसनेशनल एजुकेशन, पाठ्यक्रम विकास और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की इच्छा व्यक्त की।
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