गंभीर बीमारी से एक्ट्रेस का निधन, फ्लैट में मिली लाश

by PragyaPragya
गंभीर बीमारी से एक्ट्रेस का 'निधन'फ्लैट में मिली 'लाश'!

परवीन बाबी: एक अद्भुत सफर और दर्दनाक अंत

बॉलीवुड की चमक-धमक में कई ऐसी अभिनेत्रियाँ हैं जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता और अपनी खूबसूरती से सबको प्रभावित किया। लेकिन इनकी निजी ज़िंदगी हमेशा सुखद नहीं रही। ऐसी ही एक अदाकारा थीं परवीन बाबी, जिनकी खूबसूरती और स्टाइल ने उन्हें बहुत लोकप्रियता दिलाई, लेकिन जिनकी ज़िंदगी में कई दर्दनाक पल भी आए।

करियर की शुरुआत और ऊँचाइयाँ

परवीन बाबी ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत बी.आर. इशारा की फिल्म ‘चरित्र’ से की थी। हालांकि उनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन उनके सौंदर्य और अभिनय ने उन्हें कई प्रस्ताव दिलाए। 1974 में आई फिल्म ‘मजबूर’ के बाद वे बॉलीवुड में एक जाना-माना नाम बन गईं। उनके द्वारा निभाया गया ‘बार डांसर’ का किरदार फिल्म ‘दीवार’ में उन्हें एक शीर्ष अदाकारा बना दिया।

जीवन के अंधेरे पहलू

बॉलीवुड में परवीन की चमक को उनकी गंभीर मानसिक बीमारी, ‘पैरानॉइड सिज़ोफ्रेनिया’ ने प्रभावित किया। जब वे अपने करियर के चरम पर थीं, तभी यह बीमारी उन्हें घेरने लगी। परवीन ने कोशिश की कि उनकी बीमारी का पता किसी को न चले, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति बिगड़ती गई। उनके अजीब व्यवहार और बेतुके आरोपों ने उन्हें एकाकी बना दिया।

अंतिम दिन और विवाद

2005 में, जब परवीन बाबी का निधन हुआ, तब उनकी लाश तीन दिनों तक उनके अपार्टमेंट में पड़ी रही। पड़ोसियों ने तब उनके घर की दुर्गंध महसूस की, जब दूध और अखबार का सामान जमा होने लगा था। पुलिस के पहुंचने पर उनके शव की हालत बहुत बुरी थी।

महेश भट्ट के साथ रिश्ता

महेश भट्ट के साथ परवीन बाबी का रिश्ता काफी चर्चित रहा। भट्ट ने एक बार बताया था कि परवीन की मानसिक स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें उनसे दूर रहना पड़ा। उनका रोमांस और साथी के रूप में खड़े रहना दोनों ही कठिनाई से भरे रहे।

सफलता और हानि की कहानी

परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल 1949 को जूनागढ़, गुजरात में हुआ था। मॉडलिंग से शुरुआत करने वाली परवीन ने 1969 में ‘Femina Miss India’ का खिताब जीता और वे पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं जिनकी तस्वीर टाइम मैगज़ीन के कवर पर छपी। 70 और 80 के दशक में उनकी कई हिट फिल्में रहीं, जैसे ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘काला पत्थर’, और ‘नमक हलाल’।

अखंड अकेलापन

अपनी ज़िंदगी के अंत में, परवीन अकेले और बीमार थीं। उनके जीवन में पुरुषों की कमी के बावजूद, वे प्यार की तलाश में रहीं, लेकिन कभी सफल नहीं हो पाईं। 20 जनवरी 2005 को उनका निधन हुआ, जो वास्तव में एक दुखद कहानी है।

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