बसंत पंचमी 2026: 23 जनवरी को मनाई जाएगी, पूजा का महत्व और सामग्री की सूची जानें।

by PragyaPragya
Saraswati Puja

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

बसंत पंचमी: उल्लास का पर्व 🌼

जमशेदपुर: विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर जमशेदपुर, रांची और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ अपने चरम पर हैं। पूजा-पाठ, पंडाल और प्रतिमाओं के निर्माण के साथ-साथ बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है, जो इस बार के सरस्वती पूजा के भव्य होने का संकेत दे रही है।

पूजा का शुभ समय ⏰

इस वर्ष, विद्वानों के अनुसार सरस्वती पूजा के लिए सुबह 7:37 बजे एक विशेष शुभ मुहूर्त है। माघ मास की शुक्ल पंचमी को ज्ञान और ध्वनि के प्रकट होने का दिन माना जाता है, जिससे ये दिन विद्या की आरंभ के लिए अत्यंत फलदायी समझा जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार सुबह से लेकर दोपहर तक देवी मां की पूजा कर सकते हैं।

रति-कामदेव और लेखनी पूजा का महत्व

बसंत पंचमी केवल सरस्वती पूजा तक सीमित नहीं है। इसे मदन पंचमी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन रति और कामदेव की पूजा का विशेष महत्व है। प्रेम और सृजन का प्रतीक यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन के साथ जुड़ा है, जो प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ दांपत्य जीवन के सामंजस्य का भी प्रतीक है।

बंगाली समुदाय के लिए, इस दिन लेखनी पूजा का भी महत्व है, जिसमें कलम, दवात और पुस्तकों को मां सरस्वती के चरणों में अर्पित किया जाता है। छोटे बच्चों को पहला अक्षर ज्ञान देने की परंपरा भी इसी दिन आडंबरपूर्वक निभाई जाती है।

मूर्तिकारों की गतिविधियाँ 🎨

जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में मूर्तिकार सरस्वती प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। बताया गया कि इस वर्ष प्रतिमाओं की मांग पिछले वर्षों से अधिक है। मूर्तियों की कीमत 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक तय की गई है। मूर्ति निर्माण के लिए कोलकाता के कुम्हारटोली से विशेष मिट्टी लाने की प्रक्रिया जारी है।

बाजारों में रौनक ✨

साकची, बिष्टुपुर, टेल्को, और सोनारी के प्रमुख बाजारों में पूजा की सामग्रियों और सजावटी सामान के लिए ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। विद्यालयों और कॉलेजों में सरस्वती पूजा समितियाँ तैयारियों में जुटी हैं, जिसमें पंडाल सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।

अबूझ मुहूर्त का महत्व

बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, जब बिना पंचांग देखे विभिन्न शुभ कार्य किए जा सकते हैं। यह दिन विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान साधकों के लिए नई शुरुआत का अवसर माना जाता है।

छात्रों की राय

कक्षा दस में पढ़ने वाले मोहित ने कहा कि वह भी मूर्ति लेने आया है और यह बताया कि सरस्वती पूजा की तैयारी दो महीने पहले से शुरू हो गई थी।

बसंत पंचमी का यह पर्व न केवल विद्या का उत्सव है, बल्कि यह प्रेम और मित्रता का भी प्रतीक है।

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