बलिया रंग महोत्सव: नाटक ‘दधीचि @ यूथ.कॉम’ ने दर्शकों की तालियां बटोरीं।

by PragyaPragya
Ballia Rang Mahotsav : बलिया रंग महोत्सव में नाटक ‘दधीचि @ यूथ. कॉम’ ने खूब बटोरी तालियां

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

अखिल भारतीय नाट्य एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का सफल आयोजन 🎭

बागी बलिया, उत्तर प्रदेश में 16 से 18 जनवरी तक आयोजित अखिल भारतीय नाट्य एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता में देशभर से प्रतिभाशाली कलाकारों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृति को बढ़ावा देना और नाट्य कला के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाना था।

जमशेदपुर की प्रसिद्ध नाट्य संस्था, पथ – पीपुल्स एसोसिएशन फॉर थिएटर, के निर्देशक मोहम्मद निजाम ने इस आयोजन में निर्णायक की भूमिका निभाई। पहले दिन, नाट्य संस्था ने ‘दधीचि @ यूथ.कॉम’ का मंचन किया, जिससे दर्शकों का मंत्रमुग्ध होना निश्चित था।

नाटक का विषय और संदेश 📜

‘दधीचि @ यूथ.कॉम’ समकालीन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उजागर करते हुए युवा वर्ग के भटकाव, पारिवारिक उपेक्षा और राजनीतिक दोहन पर आधारित था। यह नाटक यह सवाल उठाता है कि युवा पीढ़ी का आक्रोश किस प्रकार नकारात्मक सोच में परिवर्तित हो सकता है और इसे विभिन्न राजनीतिक शक्तियों द्वारा किस तरह से अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

नाटक का अंत एक निर्णायक संघर्ष की संभावना से होता है, जो युवा ऊर्जा के सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उम्मीद जगाता है।

प्रमुख कलाकारों की सूची 🌟

नाटक में निम्नलिखित कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया:

  • अरुणि: रूपेश कुमार
  • अभिमन्यु: सत्यम सिंह
  • एकलव्य: आशुतोष कुमार सिंह
  • रंजन: रूपेश प्रसाद
  • संतोष: सुमन सौरभ कुमार
  • मंदिरा: छवी दास
  • प्रो. शंकर सक्सेना: मोहम्मद निज़ाम

नाटक की प्रस्तुति और तकनीकी टीम 🎬

मंचन के लिए ख़ुर्शीद आलम ने कमान संभाली, जबकि मंच सज्जा और वस्त्र विन्यास में राजकुमार, रूपेश और छवी दास का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पार्श्व संगीत की रचना भी रूपेश और राजकुमार द्वारा की गई।

निष्कर्ष

‘दधीचि @ यूथ.कॉम’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को गंभीर आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया और युवाओं की भूमिका पर एक सार्थक संवाद स्थापित किया। इस नाटक को दर्शकों और समीक्षकों से विशेष प्रशंसा प्राप्त हुई, जो इसकी सफलता का एक प्रमुख संकेत है।

इस प्रकार, इस नाट्य महोत्सव ने न केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा दिया, बल्कि समकालीन मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।

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