नाना पाटेकर ने किस डायरेक्टर के साथ काम करने की خواہिश जताई?

by PragyaPragya
किस डायरेक्टर के साथ काम करना चाहते थे नाना पाटेकर? उनकी तारीफ को मानते थे अवॉर्ड से भी उपर | Nana Patekar Birthday Sepcial Director Satyajit Ray Praise Biggest Award

मुंबई: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रख्यात अभिनेता नाना पाटेकर आज 1 जनवरी 2026 को अपने 75वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। नाना को उन कलाकारों में शामिल किया जाता है, जिन्होंने अभिनय को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक साधना के रूप में स्वीकार किया है। उनके करियर में अनेक पुरस्कार आये हैं, लेकिन उनके दिल के बेहद करीब एक ऐसा सम्मान रहा है, जो किसी मंच पर नहीं मिला।

बॉलीवुड में प्रायः सफलता का आंका जाना ट्रॉफियों और तालियों के द्वारा होता है। नाना पाटेकर ने हमेशा खुद को इस सोच से अलग रखा। उनके लिए अभिनय की असली कसौटी ईमानदारी और सच्चाई रही है। इसी कारण उन्होंने कई बार कहा है कि उन्हें पुरस्कारों से ज़्यादा काम की पहचान महत्वपूर्ण लगती है।

किस डायरेक्टर के साथ काम करना चाहते थे नाना पाटेकर?

एक साक्षात्कार में नाना पाटेकर ने बताया था कि उनका सपना हमेशा महान फिल्मकार सत्यजीत रे के साथ काम करने का रहा है। वह उन्हें सिनेमा का गुरु मानते थे। लेकिन, दुर्भाग्यवश, उन्हें कभी भी उनके निर्देशन में काम करने का अवसर नहीं मिला। यह उनके लिए एक अधूरी इच्छा बनकर रह गई।

बाद में नाना को यह जानकारी मिली कि सत्यजीत रे ने अपनी निजी डायरी में लिखा था कि वह नाना पाटेकर के साथ काम करना चाहते थे। यह सुनकर नाना पाटेकर की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उनके अनुसार, किसी महान कलाकार की सच्ची सराहना किसी भी पुरस्कार से ज़्यादा मूल्यवान होती है।

नाना पाटेकर के लिए क्यों खास थी यह तारीफ

नाना पाटेकर ने स्पष्ट किया कि जब उन्हें यह बात ज्ञात हुई, तो उन्होंने महसूस किया कि उन्होंने अपने अभिनय से सही दिशा चुनी है। यह प्रशंसा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह बिना किसी प्रचार या मंच के आई थी। किसी कलाकार के लिए इससे बड़ा सम्मान और कुछ नहीं हो सकता।

नाना पाटेकर का जीवन हमेशा सादगी और अनुशासन से भरा रहा है। उन्होंने कभी भी ग्लैमर का पीछा करने के बजाय अपने काम को प्राथमिकता दी। यही सोच उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग बनाती है। उनका मानना है कि एक कलाकार की असली पहचान उसका काम होता है, न कि पुरस्कारों की संख्या।

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