‘अखंडा 2’ की समीक्षा: बेहतरीन संवाद, शानदार एक्शन, ‘धुरंधर’ को टक्कर देने आई

by PragyaPragya
Akhanda 2 Review: कमाल के डायलॉग, धांसू एक्शन…'धुरंधर' को पछाड़ने आ गई है 'अखंडा-2'; पढ़े रिव्यू | Akhanda 2 movie review Boyapati Sreenu Balakrishna universe devotional action drama

बोयापति श्रीनु की ‘अखंड 2’ में दर्शकों को हंसा-हंसाकर दी जा रही है शानदार मनोरंजन

फिल्म ‘अखंड 2’ की शुरुआत बोयापति श्रीनु की आवाज में एक चेतावनी के साथ होती है, जो दर्शकों को स्पष्ट संकेत देती है कि इस फिल्म में लॉजिक का कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार, बोयापति का अंदाज दर्शकों को एक ऐसी विश्व में ले जाता है जहां हर चीज ओवर द टॉप होती है। फिल्म में **बालकृष्ण** केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि कहानी के केंद्र में स्वयं एक इंसान और सुपरहीरो की तरह भी नजर आते हैं।

कहानी एक ऐसा पड़ोसी देश दिखाती है जो भारत की आध्यात्मिक पहचान को कमजोर करने के लिए साजिशें रच रहा है। महाकुंभ के दौरान बायोवॉरफेयर के जरिए देश पर हमला किया जाता है। इस संकट से निपटने की जिम्मेदारी एक 16 वर्षीय लड़की **जननी** पर आती है, जिसका IQ 266 है। जब खतरे की स्थिति गंभीर हो जाती है, तो **अखंड** एक बार फिर लौटते हैं और जननी की सुरक्षा के साथ देश को बचाने का बीड़ा उठाते हैं। इसके बाद दर्शकों को दिव्यता, शक्ति और तीव्र एक्शन का आनंद मिलता है।

कैसी है बालकृष्ण की अखंडा?

जैसे ही **अखंडा** का प्रवेश होता है, फिल्म का मूड पूरी तरह बदल जाता है। यहां अखंडा बंदूकों को मोड़ते हैं, त्रिशूल से हेलीकॉप्टर रोकने की ताकत रखते हैं और एक मुक्के से पचास लोगों को उड़ा देते हैं। यह सब बताया जाता है कि इस दुनिया में उचित कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि अखंडा की इच्छा से सब कुछ चलता है।

एक विशेष स्नो चेज सीन में, फिल्म का विलेन जितने क्रिएटिव तरीके से चूकता है, वह इसे मनभावन बना देता है। हर एक्शन ब्लॉक में कई आइडिया एक साथ उपस्थित होते हैं। कुछ अद्भुत, कुछ अजीब, लेकिन सभी एक मनोरंजन का एहसास देते हैं। बोयापति की बिना लॉजिक वाली एक्शन कोरियोग्राफी अब एक अलग जॉनर बन चुकी है।

ड्रामा जहां इमोशन नहीं, सिर्फ ऊंचे डायलॉग

फिल्म **सनातन धर्म** की भावना को पेश करने की कोशिश करती है, लेकिन इसकी वर्ल्ड बिल्डिंग इतनी ओवरड्रामेटिक है कि असली भावनाएं कहीं खो जाती हैं। ड्रामा किसी गहरे अर्थ पर नहीं, बल्कि बड़े मिथकों के आसपास घूमता है। फिल्म में कई हास्यपूर्ण क्षण भी हैं, जैसे जब एक अधिकारी को बताया जाता है कि उसके बेटे की मौत एक भारतीय सैनिक के हाथों हुई है। यह सब फिल्म की मास अप्रोच को और चौकस बनाता है।

थमन का संगीत बना फिल्म की जान

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर, जो **थमन** द्वारा निर्मित किया गया है, बेहद प्रभावशाली है। डमरू की थाप और भारी बीट्स फिल्म को और भी बड़े पैमाने पर लाने में सहायक हैं। यदि थमन नहीं होते, तो फिल्म की ऊर्जा आधी रह जाती।

  • बालकृष्ण अपने किरदार में पूर्ण रूप से गंभीर हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और डायलॉग डिलीवरी फिल्म को एक नई ऊर्जा देती है।
  • **हर्षाली मल्होत्रा** अपने रोल में मासूमियत और गंभीरता का संतुलन लाती हैं।
  • **आदि पिनिसेट्टी** अपनी छोटी स्क्रीन टाइम के बावजूद सबसे प्रभावशाली किरदार में दिखते हैं।

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