सर्दियों में राजद का महागठबंधन से अलग होने का संभावित निर्णय

by Ananya Singh
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झारखंड की राजनीति में उठापटक: महागठबंधन पर सवाल

झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में उत्तेजक बदलाव की संभावना उत्पन्न हो रही है। राजद का महागठबंधन से अलगाव एक महत्वपूर्ण राजनीति विषय बन चुका है। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों के परिणामों ने विपक्षी गठबंधन को गहरा धक्का दिया है। कांग्रेस का प्रदर्शन चिंताजनक रहा है, जबकि राजद, जो सत्ता में वापसी का दावा कर रहा था, मुकाबले में पीछे रह गया।

गठबंधन में तनाव का इशारा

यह हार गठबंधन के भीतर अंतर्विरोधों को बढ़ा रही है। कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर असंतोष व्यक्त किया है, जिसके चलते कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई है। इस परिस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को बढ़ावा दिया है कि कांग्रेस आलाकमान बिहार में राजद से नाता तोड़ सकता है।

राजद की रणनीति पर सवाल

राजद की नीतियां और उसकी पृष्ठभूमि कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर रही हैं। अतीत में भी विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे पर विवाद उत्पन्न हुआ था, लेकिन इस बार हार ने मतभेदों को और गहरा कर दिया है।

झामुमो की स्थिति और संभावित बदलाव

झारखंड में यह स्थिति सत्तारूढ़ गठबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार चुनाव में अपने लिए सीटें मांगी थीं, लेकिन शुरुआत में आश्वासन मिलने के बावजूद पार्टी की अनदेखी हुई। इस पर झामुमो में आक्रोश व्याप्त है और समीक्षा की बात सामने आई है।

गठबंधन का भविष्य

हालांकि, नए गठबंधन स्वरूप को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन राजद के रास्ते अलग होने की चर्चाएं तेज हैं। यदि ऐसा होता है, तो हेमंत सोरेन की कैबिनेट से राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव को हटाया जा सकता है। राजद के पलायन के बाद भी सरकार की स्थिति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार के पास बहुमत से अधिक आंकड़ा है। यही कारण है कि ऐसी अटकलें तेज हो रही हैं।

कांग्रेस की समीक्षा बैठक

कांग्रेस आलाकमान दिल्ली में बिहार की हार की समीक्षा कर रहा है। इस प्रक्रिया में नए राजनीतिक समीकरणों की संभावना हो सकती है। झारखंड में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण सहयोगी दल है। झामुमो और कांग्रेस किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले एक-दूसरे से सहमति बनाकर कदम उठाने का प्रयास करेंगे। बिहार में हार के कारण राजद खेमे में गहरी निराशा है, जिससे कोई वरिष्ठ नेता गठबंधन की गतिविधियों पर सार्वजनिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है।

गठबंधन में हलचल और संभावित घटनाक्रम

वर्तमान में गठबंधन में हलचल बढ़ गई है। यदि झारखंड में राजद अलग हुआ, तो मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है। तेजस्वी यादव को झारखंड के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी। उदासीनता की स्थिति में राजद के विधायकों के दल से अलग होने का खतरा भी उठ सकता है।

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