कुड़मी को एसटी का दर्जा देने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

by AmarkantAmarkant
Published: Updated:
20251013 175129

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

सरायकेला में आदिवासी समुदाय का प्रदर्शन

सरायकेला-खरसावां, 13 अक्टूबर: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड में सोमवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों सदस्यों ने कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक पहनावे में शामिल होकर प्रखंड कार्यालय के समक्ष “कुड़मी को एसटी सूची में शामिल करने का विरोध करो” और “आदिवासी अधिकारों की रक्षा करो” जैसे नारे लगाए। यह प्रदर्शन पूरे झारखंड में आदिवासी संगठनों के बढ़ते आक्रोश का हिस्सा है, जो कुड़मी समुदाय को आदिवासी दर्जा देने को अपने अधिकारों पर हमला मानते हैं।

प्रदर्शन का माहौल 🎶

गम्हरिया प्रखंड कार्यालय के बाहर ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नारेबाजी से माहौल उत्साहित रहा। इस प्रदर्शन में गांवों के मुखिया, महिला मंडल, युवा संगठन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या शामिल हुई। आदिवासी नेताओं ने बताया कि यह विरोध किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी प्राचीन संस्कृति, भाषा, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन राजनीतिक फायदे के लिए कुड़मी समुदाय को आदिवासी घोषित करने की साजिश कर रहे हैं, जो असली आदिवासी समुदायों के लिए खतरनाक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने कुड़मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने का प्रयास किया, तो आदिवासी समुदाय व्यापक आंदोलन करने के लिए तैयार है।

ज्ञापन सौंपा, मिला आश्वासन 🤝

प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी (सीओ) को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कुड़मी समुदाय को एसटी दर्जा देने के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज की। सीओ ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगें जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाई जाएंगी। साथ ही, उन्होंने शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की।

विवाद की पृष्ठभूमि ⚖️

कुड़मी समुदाय, जो मुख्य रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में आता है, लंबे समय से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एसटी दर्जा और अपनी भाषा ‘कुड़माली’ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहा है। इस मुद्दे के संबंध में हाल के महीनों में रेल रोको और रास्ता रोको जैसे विभिन्न आंदोलनों का आयोजन किया गया है। दूसरी ओर, आदिवासी संगठनों का मानना है कि यह उनके अधिकारों का अतिक्रमण है और कुड़मी समुदाय की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आदिवासियों से भिन्न है।

आदिवासी नेताओं का बयान 🗣️

एक आदिवासी नेता ने कहा, “हमारी लड़ाई अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए है। आदिवासी समाज ने हजारों वर्षों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोया है। इसे कोई भी कानून या राजनीतिक फैसला नहीं छीन सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी संगठन किसी परिस्थितियों में कुड़मी समुदाय को एसटी सूची में शामिल होने की अनुमति नहीं देंगे।

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