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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने UNGA अपने संबोधन में किया शांति का आह्वान 🌍
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने दुनिया से शांति और समानता का संदेश दिया। उनके 19 मिनट के भाषण का समापन संस्कृत मंत्र ‘ओम शांति, शांति, शांति ओम’ के उच्चारण के साथ हुआ, जो एकता और सौहार्द्र का प्रतीक है।
गाजा-फलस्तीन संकट पर राष्ट्रपति ने जताई चिंता
अपने संबोधन में राष्ट्रपति सुबियांतो ने गाजा और फलस्तीन में चल रहे हिंसक संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने घोषणा की कि इंडोनेशिया शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, ‘इंडोनेशिया 20,000 से अधिक सैनिकों को गाजा और फलस्तीन में शांति स्थापित करने के लिए भेजने हेतु तैयार है।’ राष्ट्रपति ने बताया कि इंडोनेशिया वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का एक प्रमुख योगदानकर्ता है और वह सक्रिय रूप से शांतिदूतों की तैनाती के माध्यम से समस्याओं का समाधान करेगा।
दो-राष्ट्र समाधान पर जोर
राष्ट्रपति ने इस्राइल-फलस्तीन विवाद के समाधान को दो-राष्ट्र समाधान में देखा। उन्होंने कहा कि फलस्तीन और इस्राइल का स्वतंत्र और सुरक्षित अस्तित्व होना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गाजा में निर्दोषों पर हो रहे अत्याचार नहीं रुके, तो दुनिया एक नए और भयावह युद्ध के दौर में प्रवेश कर सकती है। सुबियांतो ने कहा, ‘हिंसा किसी भी राजनीतिक समस्या का समाधान नहीं बन सकती, क्योंकि यह केवल और हिंसा को जन्म देती है।’ उन्होंने विभिन्न समुदायों से सुलह की अपील की और कहा कि सभी धर्मों के अनुयायियों को एक-साथ शांति से जीना चाहिए।
विश्व के लिए एकता का संदेश
अपने भाषण के दौरान सुबियांतो ने कहा, ‘मानव जाति की मूर्खता, जो डर, नस्लवाद, और उत्पीड़न से उत्पन्न होती है, हमारी सामूहिक भविष्य को खतरे में डालती है।’ उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे एक सामूहिक कदम उठाएं और निर्दोष लोगों की रक्षा करें। अंत में, उन्होंने सभी धर्मों और संस्कृतियों के प्रति सम्मान के साथ एक बहुउद्देशीय अभिवादन पेश किया। यह भाषण वर्तमान में चल रही वैश्विक हिंसा और संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण शांति संदेश के रूप में सामने आया है।
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