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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
तमिल सुपरस्टार धनुष की नई फिल्म “इडली कडई” का ट्रेलर हुआ रिलीज
इडली कडई ट्रेलर: कोयंबटूर में धनुष की बहुप्रतीक्षित फिल्म “इडली कडई” के ट्रेलर के विमोचन के अवसर पर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह का माहौल था। यह फिल्म एक सामान्य इडली बेचने वाले परिवार की कहानी को बयां करती है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता के बीच का संघर्ष प्रमुखता से दर्शाया गया है। लगभग दो मिनट के इस ट्रेलर में दर्शकों को भावनाओं, रिश्तों, और संघर्षों से भरी कहानी की झलक देखने को मिली है।
परंपरा और आधुनिकता का संघर्ष
कहानी का मुख्य पात्र मुरुगन (धनुष) है, जो अपने पिता के साथ इडली के व्यवसाय में सक्रिय है। ट्रेलर की शुरूआत मुरुगन के एक संवाद के साथ होती है, जिसमें वह अपने पिता से इडली ग्राइंडर खरीदने की बात करता है ताकि मेहनती तरीके से बैटर पीसने की जरूरत न पड़े। लेकिन पिता का मानना है कि मशीन से बनी इडली का स्वाद हाथ से बनी इडली की तुलना में नहीं है, जो कि फिल्म की मूल भावनाओं को उजागर करता है।
होटल मैनेजमेंट का रास्ता
कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब मुरुगन पारिवारिक व्यवसाय छोड़कर होटल मैनेजमेंट में करियर बनाने का निर्णय लेता है। यहां उसकी मुलाकात अश्विन (अरुण विजय) से होती है। भले ही उनके साथ काम करने से मुनाफा बढ़ता है, लेकिन इसके साथ ही पारिवारिक रिश्तों में दरार भी आती है। मुरुगन के पिता अपने बेटे के व्यवसाय से दूर जाने पर निराश होते हैं, जबकि परिस्थितियां उस समय और बिगड़ जाती हैं जब अश्विन उसे धोखा देता है, जिससे न केवल इडली शैक बल्कि परिवार की प्रतिष्ठा भी खतरे में पड़ जाती है।
शानदार कलाकारों और निर्देशन की टीम
इस फिल्म में धनुष के साथ नित्या मेनन, अरुण विजय और शालिनी पांडे जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसके अलावा, दिग्गज अभिनेता सत्यराज, आर पार्थिबन, समुथिरकानी और राजकिरण भी कहानी में अपनी उपस्थिति दर्शाएंगे। फिल्म का निर्माण वंडरबार फिल्म्स और डॉन पिक्चर्स द्वारा किया गया है, जबकि संगीत की जिम्मेदारी जीवी प्रकाश ने संभाली है। यह फिल्म 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और तेलुगु में इसे “इडली कोट्टू” नाम दिया गया है।
बचपन की यादों से जुड़ी फिल्म का शीर्षक
ट्रेलर लॉन्च के दौरान धनुष ने इस फिल्म के शीर्षक के पीछे की प्रेरणादायक कहानी को साझा किया। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्हें हर दिन इडली खाने का मन करता था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि वे इसे खरीद नहीं पाते थे। इसके बजाय, वे और उनके भाई-बहन सुबह चार बजे उठकर फूल तोड़ते और उन्हें बेचकर इडली के लिए पैसे इकट्ठा करते थे। धनुष ने इस अनुभव को अपनी खुशियों में से एक बताया और इसलिए उन्होंने इस फिल्म का नाम “इडली कडई” रखा है।
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